सामाजिक वर्जनाओं के मध्य विधवा स्त्री का प्रेम-दर्शन: 'रसीदी टिकट' और 'अन्या से अनन्या' का तुलनात्मक अध्ययन
Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र अमृता प्रीतम की आत्मकथा 'रसीदी टिकट' और प्रभा खेतान की 'अन्या से अनन्या' के माध्यम से भारतीय समाज में विधवा स्त्री की स्थिति, उसके प्रेम और आत्मबोध का विश्लेषण करता है। भारतीय पितृसत्तात्मक समाज में विधवा स्त्री का प्रेम प्रायः वर्जनाओं और लांछनों का शिकार रहा है। यह शोध अन्वेषण करता है कि कैसे ये दो लेखिकाएँ पारंपरिक 'विधवा छवि' (साध्वी या त्यागमयी) को अस्वीकार कर प्रेम को अपनी अस्मिता और भावनात्मक स्वातंत्र्य के रूप में चुनती हैं। जहाँ अमृता का प्रेम रूहानी और स्मृति-प्रधान है, वहीं प्रभा का प्रेम यथार्थवादी और देह-मन के संघर्षों से उपजा है।
'रसीदी टिकट' (अमृता प्रीतम) और 'अन्या से अनन्या' (प्रभा खेतान) दोनों ही कृतियाँ स्त्री विमर्श और समाज की रूढ़ियों को चुनौती देने वाले सशक्त दस्तावेज हैं। आपके तुलनात्मक अध्ययन के लिए शोध की दृष्टि से महत्वपूर्ण की-वर्ड्स (Key Words) नीचे दिए गए हैं।
How to Cite This Article
पिंकी पंवार, डॉ. भावना चितलांगिया (2026). सामाजिक वर्जनाओं के मध्य विधवा स्त्री का प्रेम-दर्शन: 'रसीदी टिकट' और 'अन्या से अनन्या' का तुलनात्मक अध्ययन . International Journal of Multidisciplinary Research and Growth Evaluation (IJMRGE), 7(1), 909-913. DOI: https://doi.org/10.54660/.IJMRGE.2026.7.1.909-913