महाभारत में राजधर्म की संकल्पना और उसका प्रशासनिक स्वरूप
Abstract
महाभारत में राजधर्म के अंतर्गत राजा के कर्तव्यों तथा राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसके अनुसार राजा का प्रमुख दायित्व प्रजा की रक्षा, न्याय की स्थापना और राज्य की उन्नति करना है। राज्य के सुचारु संचालन के लिए योग्य मन्त्रिमण्डल, सभा-समिति तथा न्याय व्यवस्था का संगठन आवश्यक माना गया है। राज्य की सुरक्षा के लिए संगठित सेना तथा कूटनीतिक कार्यों के लिए दूतों की नियुक्ति भी महत्वपूर्ण मानी गई है। इसके साथ ही राज्य की आर्थिक स्थिरता के लिए कोष का संग्रह और संरक्षण आवश्यक बताया गया है। इस प्रकार महाभारत में वर्णित राजधर्म धर्म, नीति, न्याय और लोककल्याण पर आधारित एक आदर्श शासन व्यवस्था का प्रतिपादन करता है।
How to Cite This Article
डॉ. प्रतीक मिश्रा (2026). महाभारत में राजधर्म की संकल्पना और उसका प्रशासनिक स्वरूप . International Journal of Multidisciplinary Research and Growth Evaluation (IJMRGE), 7(2), 283-288. DOI: https://doi.org/10.54660/.IJMRGE.2026.7.2.283-288